Thursday

तुम अचानक आ गये

तुम अचानक आ गये मधुमास में
फागुनी रंग छा गये आकाश में 
प्रेम रस की चितवनी अठखेलियाँ
प्राणवन में खिल उठी फुलवारियाँ
तन हुआ बेसुध मगन मन हो गया
स्वप्न रूठे गा उठे भुजपाश में

दिन, सुनहरी धूप का झरना हुआ
सांझ मन्दिर दीप का धरना हुआ
राम जाने हर घड़ी क्यों लग रहा
ये गगन जैसे घिरा हो प्यास में

शब्द अधरों में हुए बन्धक सभी
किन्तु सरगम साँस की बजती रही
यूँ लगे महफ़िल सितारों की सजी
और चन्दा गीत गाये पास में

-लोकेश शुक्ल

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