गुनाह तीरगी के यूँ छुपा दिए गए
जहाँ-जहाँ चराग़ थे बुझा दिए गए
कुल्हाड़ियों को सान पर घिसा गया उधर
दरख़्त फिर नए इधर उगा दिए गए
गुनाह से ही तंग थे बहुत शरीफ़ लोग
अदालतों से और भी सता दिए गए
फिर आज हाकिमों से कुछ नए सवाल थे
घिसे पिटे जवाब फिर सुना दिए गए
ये जख़्म अब तलक भी इसलिए नहीं भरे
हर आदमी को बे-सबब दिखा दिए गए
फिर उसके बाद तोहमतों का सिलसिला चला
जब आईनों को आईने दिखा दिए गए
-प्रमोद वत्स
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