Sunday

बिजली की धमकियाँ

हसरतों की ज़हर बुझी लौ में
मोम का दीया जला दिया मैंने
कौन बिजली की धमकियाँ सहता
आशियां ख़ुद जला दिया मैंने

-बालस्वरूप राही

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