Wednesday

जस्टिफाई

लोग
आपको उतना ही जानेंगे
जितना उनकी सोच
और समझ का 
दायरा होगा

उतना ही देखेंगे
जितना दिखता है
या दिखाया जाता है

सब अधूरा जानते हैं
और बना लेते हैं
आपके बारे में
अपनी राय

सच तो ये है
यहाँ कोई किसी को
नहीं जानता

सिर्फ़ जताता है
कि वो जानता है

हमको हमसे बेहतर
भला कोई जान भी
कैसे सकता है

और जो किसी ने नहीं जाना
वही तो हैं हम

दरअस्ल हम जो हैं
सिर्फ़ हमीं जानते हैं
या हमारा ख़ुदा

तो फिर क्यूँ लोगों की सोच से
ख़ुद को जस्टिफाई करें

क्या फ़र्क़ पड़ता है
लोग हमें क्या जानते हैं
कैसा जानते हैं
कितना जानते हैं

फ़र्क़ पड़ता है
हम ख़ुद को क्या
और कितना जानते हैं

लोग तो लोग हैं
लोग ही रहेंगे
हम हम हैं
हम ही रहेंगे

जो किसी के भी लिए 
जानना शेष है
वही तो विशेष है

वही है हमारा व्यक्तित्व
वही है हमारा अस्तित्व
और वही हैं "हम"

- कविता 'किरण'

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