Monday

घर ख़ाली है

मेहनत तो करता हूँ फिर भी घर खाली है बाबूजी
मिट्टी के कुछ दीपक ले लो दीवाली है बाबूजी

अब तो नाम ग़रीबी का भी लेने में डर लगता है
सरकारी दस्तावेज़ों में खुशहाली है बाबूजी

लाखों दीप जलेंगे ऐसा सुनने में जब से आया
अवधपुरी जाने की ज़िद्द पर घरवाली है बाबूजी

मिट्टी बेच रहा हूँ जिसमें कोई जाल फरेब नहीं
सोना चांदी दूध मिठाई सब जाली है बाबूजी

झटका एक लगे तो सब कुछ टूटे बिखरे पलभर में
सबका जीवन चीनी मिट्टी की प्याली है बाबूजी

-ज्ञान प्रकाश आकुल

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