हे दीप तेरा वंदन, हे दीप तेरा वंदन!
तुझको है समर्पित भावों के अक्षत रोली चंदन।
तुझसे ही जग उजियारा है तुझसे डरता अंधियारा है
तुझसे जगमग चौबारा और हर राह गली आंगन
जो कण तुझसे आलोकित है वो जग में सुंदर शोभित है
वो सूर्य तेज में लोहित है और चंद्र में शीत किरण
है विनती यही ऐसा वर दे हर गाँव ठाँव खुशियाँ भर दे
जीवन को ज्योतिर्मय कर दे है चाह यही पावन
-किशोर तिवारी
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