Monday

फिर से बच्ची हो जाऊँ

अक्ल की कच्ची मन की सच्ची हो जाऊँ
अच्छो से भी ज्यादा अच्छी हो जाऊँ
बड़े-बड़ो की दुनिया की दुश्वारी देख
मन करता है फिर से बच्ची हो जाऊँ

-कविता किरण

No comments:

Post a Comment