मुद्दा तो पूरे देश का अब नौकरी का है
चेहरे पे नूर बिखरा हुआ सादगी का है
कोई बताए आदमी ये किस सदी का है
भगवान एक है तो हमें क्यूँ कहा गया
ईश्वर है पंडितों का ख़ुदा मौलवी का है
जब प्यास बुझ गई तो कोई देखे क्यूँ भला
मंदाकिनी का जल है या गोदावरी का है
हर शै में ख़ूबसूरती दिखती है आपको
सारा कमाल आपकी ज़िंदादिली का है
कम कीजिये ज़नाब पटाखे की शोरगुल
दीपावली का पर्व फ़क़त रौशनी का है
कोई बताए आदमी ये किस सदी का है
भगवान एक है तो हमें क्यूँ कहा गया
ईश्वर है पंडितों का ख़ुदा मौलवी का है
जब प्यास बुझ गई तो कोई देखे क्यूँ भला
मंदाकिनी का जल है या गोदावरी का है
हर शै में ख़ूबसूरती दिखती है आपको
सारा कमाल आपकी ज़िंदादिली का है
कम कीजिये ज़नाब पटाखे की शोरगुल
दीपावली का पर्व फ़क़त रौशनी का है
-अभिषेक सिंह
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