Monday

उदास हैं हम!

सदायें सुन लो हमारे प्यारो! ए दोस्त यारो! उदास हैं हम!
हँसी का गजरा, हमारी ज़ुल्फ़ों में आओ, बांधो! उदास हैं हम!

ये चांद-तारों की लालटेनें जो अलगनी पर टँगी हुई हैं;
सिरा गयी हैं, कोई तो जाओ, ये लौ जलाओ, उदास हैं हम!

हँसी हमारी क्या तितली, जुगनू, क्या रातरानी चहेती सबकी;
हँसी हमारी गुलाबकतरी, नज़र उतारो, उदास हैं हम!

हसीन चम्पा को क़त्ल कर रँग बनाने वालो तुम्हें ख़बर है?
कनेर कितना उदास बैठा, उसे बताओ, उदास हैं हम!

शरद महीने में जन्मदिन है औ शाहज़ादी का हाल देखो;
ज़बीं को चूमो, पियो हरारत, गले लगाओ, उदास हैं हम!

चनाब! तुम भी तो रोई होगी उदास सोहनी के दुःख को छूकर;
तो हम भी खानाख़राब ही हैं, हमें सम्हालो! उदास हैं हम!

चलन में थी सो हँसी पहन ली मगर ग़मों से मिलीभगत है;
दुःखों ने हमको हसीन रक्खा, सो दुःख ही लाओ, उदास हैं हम!

-सरगम अग्रवाल

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