Tuesday

राम रतन धन

पायो जी 
मैंने राम रतन धन पायो

वस्तु अमोलिक दी मेरे सतगुरु 
किरपा करि अपनायो
जनम-जनम की पूंजी पाई 
जग में सभी खोवायो
खरचै न खूटै, चोर न लूटै 
दिन-दिन बढ़त सवायो
सत की नाव, खेवटिया सतगुरु 
भवसागर तर आयो
मीरा के प्रभु गिरिधर नागर 
हरष-हरष जस गायो

~मीराबाई

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