बेचारे नेता जी की दुनिया ही उजड़ गयी
दुःख प्रकट करने एक रूपसी भी आयी
रो-रोकर उसने पत्नी से निकटता जतायी
जब रोना रुका, तो बोली रूपसी चमेली-
‘मरने वाली मेरी एकमात्र थी सहेली
अब आप मुझ पर एक मेरहबानी कीजिये
मरने वाली की कोई प्यारी सी निशानी दीजिये
ताकि याद आयेगी, तो दिल बहल जायेगा’
नेताजी बोले-
‘मुझसे काम चल जायेगा?’
-मोहन सोनी
रो-रोकर उसने पत्नी से निकटता जतायी
जब रोना रुका, तो बोली रूपसी चमेली-
‘मरने वाली मेरी एकमात्र थी सहेली
अब आप मुझ पर एक मेरहबानी कीजिये
मरने वाली की कोई प्यारी सी निशानी दीजिये
ताकि याद आयेगी, तो दिल बहल जायेगा’
नेताजी बोले-
‘मुझसे काम चल जायेगा?’
-मोहन सोनी
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