नागफनी आँचल में बान्ध सको तो आना
धागों बिन्धे गुलाब हमारे पास नहीं
हम तो ठहरे निपट अभागे
आधे सोये, आधे जागे
थोड़े सुख के लिए उम्र भर
गाते फिरे भीड़ के आगे
कहाँ-कहाँ हम कितनी बार हुए अपमानित
इसका सही हिसाब हमारे पास नहीं
हमने व्यथा अनमनी बेची
तन की ज्योति कंचनी बेची
कुछ न बचा तो अन्धियारों को
मिट्टी मोल चान्दनी बेची
गीत रचे जो हमने, उन्हें याद रखना तुम
रत्नों मढ़ी किताब हमारे पास नहीं
झिलमिल करतीं मधुशालाएँ
दिन ढलते ही हमें रिझायें
घड़ी-घड़ी हर घूँट-घूँट हम
जी-जी जायें, मर-मर जायें
पीकर जिसको चित्र तुम्हारा धुन्धला जाए
इतनी कड़ी शराब हमारे पास नहीं
आखर-आखर दीपक बाले
खोले हमने मन के ताले
तुम बिन हमें न भाए पल भर
अभिनन्दन के शाॅल-दुशाले
अबकी बिछुड़े कहाँ मिलेंगे -ये मत पूछो
कोई अभी जवाब हमारे पास नहीं
-किशन सरोज
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