Saturday

सिराय के दरिया खइयो

धरती वीर विहीना नांई रहनी, काऊ धोखे में मति रहियो
काऊ धोखे में मति रहियो, नेंक सिराय के दरिया खइयो

नित उधार के हथियारन की नाहक हाट लगावै
बन्दर घुड़की दै-दै कें तू, का मोको डरपावै
कहूँ ऐसौ ना होय तिरंगौ, दुनिया पै फहरावै
बन्दिश काऊ मुलक की नांई सहनी, काऊ धोखे में मति रहियो

हमने बड़े-बड़े रावण देखे, बड़ी-बड़ी देखीं लंका
हमने बड़े-बड़े कंश पछारे, नांहि काल की शंका
मरिवे से कब-कब डरपे हैं, धीर वीर रणबंका
केशर पाग बिरथ में नांई पहनी, काऊ धोखे में मति रहियो

रणभूमि कैसे भूलेगी, मानिक शा, करियप्पा
सदा भवानी रहे दाहिने, सन्मुख गणपति बप्पा
अबकी तोसो कहवाइ देइंगे, हम पानी ते पप्पा
हमने हाथनि चुड़ियाँ नांई पहनी, काऊ धोखे में मति रहियो

-पवन चैहान

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