कभी गीत तुम सुनाओ, कभी गीत हम सुनायें
आकाश गुनगुनाये, धरती न बोल पाये
जो भी हो जिसको कहना, कभी सामने तो आये
कहीं यामिनी में हम-तुम संयोग ऐसा पायें
कभी दीप तुम जलाओ, कभी दीप हम जलायें
नहीं चाहते सितारे, कभी चान्दनी पधारे
रहें मेघ सिर पटकते, सौदामिनी के द्वारे
कहीं चान्दनी में हम-तुम संयोग ऐसा पायें
कभी तुम हमें मनाओ, कभी हम तुम्हें मनायें
कह तक न पाऊँ ऐसा उन्माद भी नहीं है
कुछ कहते डर रहे हैं कुछ याद भी नहीं है
कहीं बेबसी में हम-तुम संयोग ऐसा पायें
कभी याद तुम न आओ, कभी याद हम न आयें
-बलवीर सिंह ‘रंग’
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