Wednesday

मैंने अच्छा न किया

काग़ज़ी फूल से खु़श्बू की तमन्ना करके
मैंनें अच्छा न किया तुझपे भरोसा कर के

एक जुगनू जिसे सूरज ने छुपा रक्खा था
मैंने पहचान लिया उसको अंधेरा करके

मैंने चुपके से तेरे घर का पता ढूंढ़ा है
अपनी मासूम तमन्नाओं का पीछा करके

मेरी तन्हाई के दर्पण में है चेहरा तेरा
देख लेता हूँ तुझे ख़ुद को अकेला करके

जिसकी तक़दीर में लिक्खा न था पूरा होना
फिर से देखूंगा वही ख़्वाब अधूरा करके

ज़ब्ते-ग़म अपनी हदों से है गुज़रता कैसे
और देखेंगे तेरे दर्द को गहरा करके

दिल वो बच्चा जिसे परवाह किसी की भी नहीं
रख दिया ज़िंदगी तुझको भी खिलौना करके

रस्मे-उल्फ़त को इबादत ही बना देती हैं 
मेरी पलकें तेरी परछाईं को सजदा करके

आदमी हूँ, मेरी कमियाँ भी मेरे साथ में हैं
ख़ुद से बिछड़ा न कभी ख़ुद को फ़रिश्ता करके

-पंकज पलाश

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