धरती नाचे घुंघरू बान्धे पाँव में
नई सुबह का सूरज उगा गाँव में
गूँथ दुल्हिनिया की वेणी में पाँखुरी
यमुना तीरे कौन बजाता बाँसुरी
पीपल के पत्ते से मनुवा डोलता
नेह भरा संकेत प्रणय रस घोलता
साँवरिया संग चल दी राधा छाँव में
किरण गन्ध-सी महकी-महकी भोर है
धूप-प्रिया की अगवानी का शोर है
चहल-पहल है मल्लाहों की बस्ती में
भरी उफनती हवा पालकी मस्ती में
मल्लाहिन ने उमर गुजारी नाव में
जंगल के आंगनवा टेसू टेरता
बौराई अमिया को फागुन हेरता
बिखर रहे हैं रंग नए आकाश में
जुड़े नए अध्याय प्रणय इतिहास में
रसिया जीवन लगा रहे हैं दाँव में
-ओंकार तिवारी
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