विज्ञापन था ‘पहलवान छाप बीड़ी’
और हमारे मुँह से निकल गया-
‘बीड़ी छाप पहलवान’।
बस, हमारे पहलवान पड़ोसी ताव खा गए
ताल ठोककर मैदान में आ गए
एक झापड़ हमारे गाल पर लगाया
हमें ग़ुस्से की बजाय
महात्मा गांधी का ख़याल आया
हमने दूसरा गाल
पहलवान के सामने पेश कर दिया
मगर वो शायद
नाथूराम गोडसे का भक्त था
उसने दूसरे गाल पर भी धर दिया
फिर मुस्कुरा कर बोला-
”एकाध और खाओगे?
लेकिन ये तो बताओ बेटा
तीसरा गाल कहाँ से लाओगे?“
हमने कहा-
”पहलवान जी,
आपकी इस अप्रत्याशित कार्रवाई ने
हमें बड़े संकट में डाल दिया है
गांधी जी ने ये तो कहा था
कि कोई एक गाल पर मारे
तो दूसरा लेकर आगे बढ़ना,
परन्तु जल्दबाज़ी में
वो ये बताना भूल गए
कि तुम जैसा कोई
पहलवान पल्ले पड़ जाए
तो क्या करना!
इसलिए हे पहलवान जी
आप ज़रा पन्द्रह मिनिट यहीं ठहरना
मैं अभी उनकी
आत्मकथा पूरी पढ़कर आता हूँ
शायद उसमें आगे कुछ लिखा हो।”
कहकर हम
पी टी उषा की गति से
घर में घुसे
पहलवान के साथ-साथ
सारे मुहल्ले वाले
हमारी दुर्दशा पर हँसे
लेकिन ठीक पन्द्रह मिनिट बाद
जब हम अपने घर से बाहर निकले
तो हमारे बायें हाथ में मूँछ
और दायें हाथ में रिवाॅल्वर था
रिवाॅल्वर का निशाना
पहलवान की छाती पर था
रिवाॅल्वर देखते ही
पहलवान हकलाने लगे
बोले- ”ये....ये... क्या
त......त.....तुम तो
म.....म.....महात्मा गांधी के
भ.....भ....भक्त हो!”
हमने कहा- ”हूँ नहीं, था।
लेकिन अभी-अभी पन्द्रह मिनिट पहले
मैंने उनकी पार्टी से इस्तीफ़ा देकर
चन्द्रशेखर आज़ाद की पार्टी ज्वाइन कर ली है
पूरी रिवाॅल्वर गोलियों से भर ली है
अब बोलो, बेटा पहलवान!
पहलवान छाप बीड़ी
या बीड़ी छाप पहलवान?“
पहलवान बोले- ”हें....हें.....हें
जैसा आप ठीक समझें श्रीमान्!”
हमने कहा- ”श्रीमान् के बच्चे
साले, गुण्डे, लफंगे, लुच्चे
अहिंसावादियों को डराता है
महात्मा गांधी के भक्तों का
मज़ाक़ उड़ाता है
ख़बरदार, आगे से पहलवानी दिखाई
तो हाथ-पैर तोड़कर
अखाड़े में डाल दूंगा
इसी रिवाॅल्वर से
खोपड़ी का गूदा निकाल दूंगा।
मुहल्लेवालो!
आगे से क़सम खा लो
आज से कोई
इस पिद्दी पहलवान की
दादागीरी नहीं सहेगा
इस देश में
अगर अहिंसावादी नहीं रह पाया
तो आतंकवादी भी नहीं रहेगा।“
-प्रदीप चैबे
पहलवान हकलाने लगे
बोले- ”ये....ये... क्या
त......त.....तुम तो
म.....म.....महात्मा गांधी के
भ.....भ....भक्त हो!”
हमने कहा- ”हूँ नहीं, था।
लेकिन अभी-अभी पन्द्रह मिनिट पहले
मैंने उनकी पार्टी से इस्तीफ़ा देकर
चन्द्रशेखर आज़ाद की पार्टी ज्वाइन कर ली है
पूरी रिवाॅल्वर गोलियों से भर ली है
अब बोलो, बेटा पहलवान!
पहलवान छाप बीड़ी
या बीड़ी छाप पहलवान?“
पहलवान बोले- ”हें....हें.....हें
जैसा आप ठीक समझें श्रीमान्!”
हमने कहा- ”श्रीमान् के बच्चे
साले, गुण्डे, लफंगे, लुच्चे
अहिंसावादियों को डराता है
महात्मा गांधी के भक्तों का
मज़ाक़ उड़ाता है
ख़बरदार, आगे से पहलवानी दिखाई
तो हाथ-पैर तोड़कर
अखाड़े में डाल दूंगा
इसी रिवाॅल्वर से
खोपड़ी का गूदा निकाल दूंगा।
मुहल्लेवालो!
आगे से क़सम खा लो
आज से कोई
इस पिद्दी पहलवान की
दादागीरी नहीं सहेगा
इस देश में
अगर अहिंसावादी नहीं रह पाया
तो आतंकवादी भी नहीं रहेगा।“
-प्रदीप चैबे
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