Saturday

अलविदा

चल दिये छोड़कर, ये शहर और मन
अलविदा कह रहे, ये भरे-भरे नयन

ज़िन्दगी जा रही, गाँव-गाँव हर नगर
क्या पता कब कहाँ ख़त्म हो ये सफ़र
है यही ज़िन्दगी या कोई है भरम
अलविदा कह रहे, ये भरे-भरे नयन

जो रही ज़िन्दगी आएंगे फिर यहाँ
अब यहाँ, कल वहाँ क्या पता फिर कहाँ
उम्र की .......... आँसुओं का भरम
अलविदा कह रहे, ये भरे-भरे नयन

साँस की साँकलें, उम्र की बेड़ियाँ
बन्धनों से बन्धी थक गईं एड़ियाँ
है यही ज़िन्दगी या कोई है भरम
अलविदा कह रहे, ये भरे-भरे नयन

भूलना ना हमें प्रीत की है क़सम
अलविदा कह रहे, ये भरे-भरे नयन

-प्रभा ठाकुर

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