अलविदा कह रहे, ये भरे-भरे नयन
ज़िन्दगी जा रही, गाँव-गाँव हर नगर
क्या पता कब कहाँ ख़त्म हो ये सफ़र
है यही ज़िन्दगी या कोई है भरम
अलविदा कह रहे, ये भरे-भरे नयन
जो रही ज़िन्दगी आएंगे फिर यहाँ
अब यहाँ, कल वहाँ क्या पता फिर कहाँ
उम्र की .......... आँसुओं का भरम
अलविदा कह रहे, ये भरे-भरे नयन
साँस की साँकलें, उम्र की बेड़ियाँ
बन्धनों से बन्धी थक गईं एड़ियाँ
है यही ज़िन्दगी या कोई है भरम
अलविदा कह रहे, ये भरे-भरे नयन
भूलना ना हमें प्रीत की है क़सम
अलविदा कह रहे, ये भरे-भरे नयन
-प्रभा ठाकुर
No comments:
Post a Comment