वक़्त का पैग़ाम, रक्खो एकता
ख़ुद-ब-ख़ुद संसार से मिट जाएगा
दुश्मनों का नाम, रक्खो एकता
प्रगति की संभावना के सिलसिले
जोड़ देंगे राम, रक्खो एकता
प्रान्त, भाषा, धर्म की संकीर्णता
है बड़ी बदनाम, रक्खो एकता
एटमी मर्दानगी शैतान की
कर रही विश्राम, रक्खो एकता
सदी लाएगी नई ख़ुशहालियाँ
कर्मठों के नाम, रक्खो एकता
बदख़याली, बदसलूकी, बदनीयत
तौर है ये आम, रक्खो एकता
तुम न बिखरो, दण्ड से या भेद से
साम हो या दाम, रक्खो एकता
छोड़ नफ़रत, भाईचारे का भजो
नाम सुबहो-शाम, रक्खो एकता
देश भारत देश जैसा है कहाँ
'नांगिया' सुखधाम, रक्खो एकता
-सत्यपाल नांगिया
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