Sunday

दल-बदल

एक नेता
दल-बदलकर घर लौटे
उन्हें पत्नी का पत्र मिला
(जो कई महीनों से
मायके गई हुई थी)
लिखा था-
”नम्मो के डैडी!
तुम्हारे साथ रहते-रहते
बोर हो गए
अब हमने
राधेलालजी से
दाम्पत्य समझौता कर लिया है।
ये समझौता
समान विचारों के आधार पर हुआ है।
हमारे दल-बदल कार्य को
लाइटली लेना
और हम भी
अपने पद-बदल कार्य को
तुमसे लाइटली लिवाएंगे।”

उनका माथा ठनका
सोचने लगे-
”दल-बदल का एक दिन ऐसा
दुःफल मिलेगा
कभी नहीं सोचा था।”

उन्होंने पुनः लिखा-
“नम्मो की जीजी!
तुम अपने घर वापस आ जाओ!
मैं भी
पुराने दल में
वापस जा रहा हूँ।”

मैडम का दिमाग़
अभी ठण्डा नहीं हुआ
फिर उन्होंने लिखा-
”पल-पल में
दल-बदल करते रहे हो
एक दल में
कुछ समय रुककर रहना;
सहानुभूतिपूर्ण विचार करूंगी।
आम का अचार
डहली में रखा है
इसे उलटते-पलटते रहना
हम तो
यहाँ बड़े आनंद की ज़िन्दगी
बिता रहे हैं।
-तुम्हारी पुरानी पत्नी
अब मिसेज राधेलाल।“

-बरसाने लाल चतुर्वेदी

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